मेरी जिन्दगी पल दो पल की
चिल-मिल में यु ही बीत गेई !
मैंने न जाना इसे
मै ने न माना इसे
सब कुछ खेल समझा
इस धरा को जेल समझा
कुछ बीत गया
कुछ बीत जाएगा
आज सब कुछ है
कल कहा कुछ रह पाएगा !
भूत को भूत समझकर
मै भूल से भूल गया
वर्तमान को कुचल कर
भविष्य अँधेरे मै ढल गया
मै अपने में मस्त रहा
फिर भी जीवन कष्ट रहा
सब कुछ पाकर भी और और करता रहा
मै जीवित ही यहाँ यु मरता रहा
क्योकि जीता था
जिस शीतलता के लिए
आज उस मन की शीत गई
मेरी जिन्दगी पल दो पल की
चिल-मिल मै यु ही बीत गई !
Beautiful lines
ReplyDeleteNice and true lines..
ReplyDeleteNice and true lines..
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